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चारधाम यात्रा से नेपाली मजदूरों की भी चमक रही किस्मत, रोजाना 10 हजार रुपये तक की कमाई

चारधाम यात्रा से नेपाली मजदूरों की भी चमक रही किस्मत, रोजाना 10 हजार रुपये तक की कमाई

चारधाम यात्रा केवल उत्तराखंड की धार्मिक और आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख आधार नहीं है, बल्कि इससे नेपाल मूल के सैकड़ों मजदूरों की आजीविका भी जुड़ी हुई है। बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में बड़ी संख्या में नेपाली मजदूर डंडी और कंडी संचालन का कार्य कर रहे हैं, जिससे यात्रा सीजन में उन्हें अच्छी आय प्राप्त होती है।

केदारनाथ धाम के 16 किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग पर श्रद्धालुओं को डंडी के माध्यम से यात्रा करवाने का जिम्मा चार-चार मजदूरों की टीम संभालती है। कठिन चढ़ाई और ऊंचाई वाले इस मार्ग पर ये मजदूर श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण सहारा बने हुए हैं।

वहीं बदरीनाथ धाम में बस अड्डे से मंदिर परिसर और माणा गांव के प्रमुख दर्शनीय स्थलों तक श्रद्धालुओं को कंडी के जरिए पहुंचाने का काम भी नेपाली मजदूर कर रहे हैं। माणा गांव में सतोपंथ ट्रैक, भीम पुल, व्यास गुफा और गणेश गुफा जैसे स्थलों की सैर कराने के लिए कंडी सेवा का व्यापक उपयोग हो रहा है।

जानकारी के अनुसार कंडी संचालक एक चक्कर के लिए 1600 से 2000 रुपये तक शुल्क लेते हैं। बदरीनाथ धाम में करीब 250 और माणा गांव में लगभग 200 पंजीकृत नेपाली मूल के कंडी संचालक सक्रिय हैं।

ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऑक्सीजन की कमी, कठिन पैदल मार्ग और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के कारण बुजुर्ग, बच्चे और अस्वस्थ श्रद्धालु कंडी सेवा का सहारा लेते हैं। यही वजह है कि यात्रा सीजन के दौरान कई मजदूर प्रतिदिन पांच से छह चक्कर लगाकर लगभग 10 हजार रुपये तक की कमाई कर रहे हैं।

चारधाम यात्रा न केवल श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, बल्कि सैकड़ों नेपाली मजदूरों और उनके परिवारों के लिए रोजगार और आजीविका का महत्वपूर्ण साधन भी बनी हुई है।