ब्रूमेशन से पहले बढ़ा सांपों का खतरा, सर्पदंश के मामलों में पांच गुना उछाल
देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में इन दिनों सर्पदंश के मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रूमेशन (शीत निष्क्रियता) में जाने से पहले सांप अधिक सक्रिय और आक्रामक हो जाते हैं, जिसके कारण काटने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं।
दून अस्पताल की इमरजेंसी में अब हर महीने औसतन 15 सर्पदंश के मरीज पहुंच रहे हैं, जबकि सामान्य दिनों में यह संख्या केवल 2 से 3 होती थी। शुक्रवार को अस्पताल में भर्ती एक मरीज की किडनी पर सांप के जहर का इतना गंभीर असर हुआ कि उसकी किडनी ने काम करना बंद कर दिया और उसे डायलिसिस करानी पड़ी।
विशेषज्ञों के अनुसार, देहरादून क्षेत्र में मुख्य रूप से चार जहरीली प्रजातियां—रसेल वाइपर, सॉ-स्केल्ड वाइपर, कॉमन क्रेट और किंग कोबरा—सक्रिय हैं। इनमें रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर का विष हीमोटॉक्सिक होता है, जो खून और किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचाता है। वहीं, कॉमन क्रेट और किंग कोबरा का विष न्यूरोटॉक्सिक होता है, जो तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर लकवे जैसी स्थिति पैदा कर सकता है।
दून अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. हरीश बसेरा के अनुसार, न्यूरोटॉक्सिक विष नसों और मांसपेशियों के बीच संचार को बाधित करता है, जबकि हीमोटॉक्सिक विष किडनी फेलियर जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न कर सकता है।
देहरादून जू के वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रदीप मिश्रा बताते हैं कि ब्रूमेशन वह अवस्था है, जब ठंड के मौसम में सांप कई महीनों तक निष्क्रिय रहते हैं। इस अवधि से पहले वे अधिक भोजन जुटाने और प्रजनन के कारण अत्यधिक सक्रिय हो जाते हैं। अक्टूबर तक वे ब्रूमेशन में चले जाते हैं, जहां उनका मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और वे बहुत कम ऊर्जा खर्च करते हुए कई महीनों तक जीवित रहते हैं।
विशेषज्ञों ने लोगों से बरसात और जंगलों या झाड़ियों वाले क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने तथा सर्पदंश की स्थिति में तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचने की अपील की है।

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