राम मंदिर में सेवा और परंपरा के नए अध्याय की शुरुआत, अयोध्या के संतों को मिली अहम जिम्मेदारी
अयोध्या के राम मंदिर से जुड़ी व्यवस्थाओं में अब सेवा और परंपरा के नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से अयोध्या के संतों को जोड़ते हुए एक नई धार्मिक समिति का गठन किया गया है।
बताया जा रहा है कि इस समिति में अयोध्या के पांच प्रमुख संतों के साथ ट्रस्ट के मूल संत सदस्य भी शामिल हैं। ट्रस्ट के महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरी का कहना है कि राम मंदिर अब केवल निर्माण के चरण तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवा, परंपरा और व्यवस्थाओं के नए दौर में प्रवेश कर रहा है, जिसमें अयोध्या के संतों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
बुधवार को ट्रस्ट के नवनियुक्त महासचिव संत स्वामी गोविंददेव गिरी महाराज हरिद्वार के कनखल स्थित आश्रम पहुंचे। यहां उन्होंने जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया।
इस दौरान अयोध्या में चल रहे विकास कार्यों, व्यवस्थाओं में बदलाव और नई व्यवस्थाओं को लेकर भी चर्चा हुई।
अमर उजाला से बातचीत में स्वामी गोविंद देव गिरी ने कहा कि अब तक अयोध्या और वहां के निवासियों की रामलला से जुड़ी भूमिका को अपेक्षित रूप से स्थान नहीं मिला। अब अयोध्यावासियों और संतों को अधिक सहभागिता के साथ जिम्मेदारी देने की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है।

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