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हरिद्वार में कांवड़ मेला संपन्न, 4.80 करोड़ शिवभक्तों ने भरा गंगाजल; अब सफाई अभियान की चुनौती

हरिद्वार में कांवड़ मेला संपन्न, 4.80 करोड़ शिवभक्तों ने भरा गंगाजल; अब सफाई अभियान की चुनौती

हरिद्वार में 30 जुलाई से शुरू हुआ ऐतिहासिक कांवड़ मेला मंगलवार को संपन्न हो गया। इस बार धर्मनगरी में आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि हरकी पैड़ी से लेकर कनखल, ज्वालापुर और आसपास के क्षेत्रों तक हर तरफ शिवभक्तों की भीड़ नजर आई।

पुलिस-प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक इस बार कुल 4 करोड़ 80 लाख 40 हजार कांवड़िये हरिद्वार पहुंचे और गंगा जल लेकर अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए। अकेले मेले के अंतिम दिन मंगलवार को 36 लाख 62 हजार कांवड़ियों ने गंगाजल उठाया।

भगवा रंग में रंगी धर्मनगरी में पूरे मेले के दौरान ‘बम-बम भोले’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे गूंजते रहे। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पैदल, डाक कांवड़ और विभिन्न वाहनों के जरिए हरिद्वार पहुंचे।

सोमवार शाम छह बजे तक 4 करोड़ 43 लाख 78 हजार शिवभक्त जल लेकर रवाना हो चुके थे। मंगलवार की संख्या जोड़ने के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 4 करोड़ 80 लाख 40 हजार हो गया। पिछले साल 2025 में करीब 4 करोड़ 52 लाख 90 हजार कांवड़ यात्री हरिद्वार पहुंचे थे।

एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर के अनुसार, इस बार कांवड़ मेले में कुल 4 करोड़ 80 लाख 40 हजार कांवड़ यात्री पहुंचे और गंगाजल लेकर अपने गंतव्य के लिए रवाना हुए।

मेले के बाद सफाई की बड़ी चुनौती

कांवड़ मेला समाप्त होते ही अब हरिद्वार प्रशासन के सामने सफाई की बड़ी चुनौती है। मेले के दौरान करीब 7 हजार मीट्रिक टन कूड़ा निकलने का अनुमान है। प्रशासन ने 12 से 18 अगस्त तक विशेष सफाई अभियान चलाने का निर्णय लिया है।

नगर आयुक्त नंदन कुमार के मुताबिक डाक कांवड़ के सिर्फ दो दिनों में शहर में करीब 1700 मीट्रिक टन कूड़ा जमा हुआ। शिवरात्रि की शाम आरती के बाद जैसे ही घाट खाली हुए, सफाई कर्मियों की बड़ी टीम को तुरंत सफाई अभियान में उतार दिया गया।

मंगलवार रात से बुधवार सुबह तक घाटों की सफाई जारी रहेगी, जबकि दिन के समय शहर के वार्डों और गलियों में सफाई टीमें भेजी जाएंगी।

2 हजार टन से ज्यादा कपड़ों का होगा रिसाइक्लिंग

इस बार श्रद्धालुओं की ओर से छोड़े गए करीब 2 हजार मीट्रिक टन से अधिक कपड़ों को रिसाइकिल कर कपास तैयार करने की योजना है। सफाई के दौरान सूखा और गीला कचरा, प्लास्टिक और कपड़ों को अलग-अलग एकत्र कर उचित निस्तारण के लिए भेजा जा रहा है।

आस्था के इस विशाल आयोजन के समापन के बाद अब प्रशासन का पूरा फोकस हरिद्वार को जल्द से जल्द स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने पर है।

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