जसपाल राणा के निधन के 16 दिन बाद मां ने भी तोड़ा दम, बेटे की आखिरी झलक देखने की इच्छा रह गई अधूरी
देहरादून। अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज और भारत के पूर्व पिस्टल शूटर जसपाल राणा की मां श्यामा देवी (72) का लंबी बीमारी के बाद दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया। संयोग ऐसा रहा कि जिस दिन 50 वर्ष पहले जसपाल राणा का जन्म हुआ था, उसी दिन उनकी मां ने अंतिम सांस ली। इस भावुक घटना से परिवार के साथ-साथ पूरे उत्तराखंड में शोक की लहर दौड़ गई।
श्यामा देवी के निधन की खबर मिलते ही टिहरी जिले के चिलामू गांव और पैतृक क्षेत्र नैनबाग में शोक का माहौल बन गया। कुछ ही दिन पहले परिवार ने अपने होनहार बेटे जसपाल राणा को खोया था और अब मां के निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
जानकारी के अनुसार, श्यामा देवी लंबे समय से गंभीर रूप से बीमार थीं। 12 जून को जसपाल राणा के आकस्मिक निधन के बाद उनकी तबीयत और बिगड़ गई थी। उनकी नाजुक स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए परिवार ने उन्हें बेटे के निधन की जानकारी नहीं दी थी।
बताया जा रहा है कि बीमारी के दौरान श्यामा देवी बार-बार अपने बेटे जसपाल से मिलने की इच्छा जताती रहीं, लेकिन उन्हें यह कभी पता नहीं चल सका कि उनका बेटा उनसे पहले ही इस दुनिया को अलविदा कह चुका है। बेटे को अंतिम बार देखने की उनकी इच्छा अधूरी ही रह गई।
गौरतलब है कि टिहरी जिले के चिलामू गांव निवासी जसपाल राणा भारत के पिस्टल निशानेबाजों के हाई-परफॉर्मेंस कोच के रूप में कार्यरत थे। म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ विश्व कप से लौटते समय उन्हें सीने में दर्द की शिकायत हुई थी। इसके बाद दिल्ली के एक अस्पताल में उनकी स्टेंट सर्जरी की गई। स्वास्थ्य में सुधार के दौरान ही 12 जून को उनका आकस्मिक निधन हो गया।
महज 18 वर्ष की आयु में विश्व रिकॉर्ड बनाकर अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने वाले जसपाल राणा ने राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों में भारत के लिए कई स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। उन्हें भारतीय निशानेबाजी के सबसे सफल खिलाड़ियों में गिना जाता है।
श्यामा देवी के निधन के बाद क्षेत्र के लोगों, खेल प्रेमियों और शुभचिंतकों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। लोगों का कहना है कि कुछ ही दिनों के भीतर मां और बेटे के इस तरह दुनिया से विदा हो जाने से पूरा क्षेत्र स्तब्ध है।

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