उत्तराखंड में बड़ा बदलाव! 1 जुलाई से खत्म होगा मदरसा बोर्ड, छात्रों को मिलेगा बड़ा फायदा
उत्तराखंड में 1 जुलाई से शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार मदरसा बोर्ड को समाप्त कर रही है। इसके बाद प्रदेश के सभी मदरसों में उत्तराखंड राज्य शिक्षा बोर्ड का पाठ्यक्रम लागू होगा। सरकार का दावा है कि इससे मदरसों में पढ़ने वाले हजारों छात्रों को मुख्यधारा की शिक्षा से जुड़ने का अवसर मिलेगा और उनके प्रमाणपत्र भी सरकारी स्तर पर मान्य होंगे।
उत्तराखंड मदरसा बोर्ड का गठन वर्ष 2011 में किया गया था, लेकिन करीब 15 साल बीतने के बाद भी इसे राज्य शिक्षा बोर्ड के समकक्ष मान्यता नहीं मिल सकी। इसका असर सीधे छात्रों पर पड़ा, क्योंकि मदरसा बोर्ड के प्रमाणपत्रों का सरकारी नौकरियों और कई शैक्षणिक संस्थानों में सीमित महत्व था। इसी कारण पिछले कुछ वर्षों में मदरसों में छात्रों की संख्या लगातार घटती गई।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने फरवरी 2026 में मदरसा बोर्ड को समाप्त करने की घोषणा की थी। अब 1 जुलाई से सभी मदरसों को शिक्षा विभाग से मान्यता लेनी होगी और उत्तराखंड राज्य शिक्षा बोर्ड का पाठ्यक्रम अपनाना होगा। साथ ही सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के दायरे में लाया जाएगा।
मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी का कहना है कि इस फैसले से छात्रों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों का महत्व बढ़ेगा। अब तक तहतानिया, फौकानिया, मुंशी, मौलवी और आलिम जैसी उपाधियों को समकक्ष मान्यता नहीं थी, जिससे छात्र सरकारी नौकरियों में इनका लाभ नहीं उठा पाते थे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन प्रमाणपत्रों को अधिक मान्यता मिलने की उम्मीद है।
हालांकि इस बदलाव के बीच मदरसा बोर्ड में कार्यरत कर्मचारियों का भविष्य भी चर्चा का विषय बना हुआ है। पीआरडी और उपनल के माध्यम से कार्यरत कर्मचारी सरकार से अपनी सेवाओं को लेकर स्पष्ट नीति की मांग कर रहे हैं।
सरकार का मानना है कि इस फैसले से मदरसों के छात्र बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकेंगे। वहीं आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि नई व्यवस्था शिक्षा व्यवस्था में कितना बड़ा बदलाव लेकर आती है।

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