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क्या भगवान के दर्शन भी अब पैसे देकर होंगे?

 

क्या भगवान के दर्शन भी अब पैसे देकर होंगे?
उत्तराखंड के बदरीनाथ धाम में वीआईपी दर्शन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि श्रद्धालुओं से 1100 रुपये लेकर बैक डोर से दर्शन कराए गए, जबकि इस शुल्क को लेकर मंदिर समिति की कोई आधिकारिक मंजूरी नहीं थी। अब मामला तूल पकड़ चुका है और पूरे प्रकरण की जांच व ऑडिट की बात सामने आई है।

उत्तराखंड के प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में वीआईपी दर्शन के नाम पर 1100 रुपये वसूलने का मामला विवादों में आ गया है। आरोप है कि जून माह के अंतिम सप्ताह से श्रद्धालुओं से प्रति व्यक्ति 1100 रुपये लेकर विशेष व्यवस्था के तहत दर्शन कराए गए। हालांकि इस शुल्क को लागू करने के लिए बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति यानी बीकेटीसी की ओर से कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया था।

विवाद के केंद्र में समिति के एक वैयक्तिक सहायक का नाम भी सामने आया है। आरोप है कि प्रोटोकॉल व्यवस्था के दौरान वीआईपी दर्शन के लिए शुल्क आधारित व्यवस्था शुरू कराई गई। शिकायत मिलने के बाद अब इस पूरे मामले में वसूली गई राशि का ऑडिट कराने की तैयारी की जा रही है, ताकि यह पता चल सके कि कुल कितनी रकम एकत्र हुई और उसका उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया गया।

वहीं बीकेटीसी के सीईओ सोहन सिंह रांगड़ का कहना है कि यात्रा सीजन में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए यह अस्थायी व्यवस्था की गई थी और शुल्क लेने पर बाकायदा रसीद भी दी गई। उनका दावा है कि पूरी धनराशि का रिकॉर्ड समिति के पास सुरक्षित है।

दूसरी ओर बीकेटीसी के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती का कहना है कि वीआईपी दर्शन के लिए शुल्क लगाने संबंधी कोई प्रस्ताव समिति की बैठक में पारित नहीं हुआ था। ऐसे में बिना बोर्ड की मंजूरी शुल्क वसूलना समिति के नियमों और एक्ट की भावना के विपरीत माना जा सकता है।

अब इस पूरे मामले पर सभी की नजरें जांच और ऑडिट रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह साफ हो सकेगा कि वीआईपी दर्शन के नाम पर वसूला गया शुल्क नियमों के तहत था या नहीं।