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232 मीटर ऊंचा होगा किशाऊ बांध, बनेगा देश का दूसरा सबसे ऊंचा बांध; 5 राज्यों को मिलेगा पानी, 422 MW बिजली का उत्पादन

232 मीटर ऊंचा होगा किशाऊ बांध, बनेगा देश का दूसरा सबसे ऊंचा बांध; 5 राज्यों को मिलेगा पानी, 422 MW बिजली का उत्पादन

 

देश के सबसे ऊंचे टिहरी बांध के बाद अब उत्तराखंड और हिमाचल की सीमा पर बनने जा रहा किशाऊ बांध देश का दूसरा सबसे ऊंचा और एशिया का 11वां सबसे ऊंचा बांध बनने जा रहा है। इसकी प्रस्तावित ऊंचाई 232 मीटर और लंबाई करीब 680 मीटर होगी।

ताजिकिस्तान का निर्माणाधीन रोगुन बांध 335 मीटर की प्रस्तावित ऊंचाई के साथ दुनिया का सबसे ऊंचा बांध बनने जा रहा है। वहीं किशाऊ परियोजना को केंद्र सरकार ने वर्ष 2008 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया था। इसके तहत परियोजना की लागत का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाना है।

किशाऊ बांध से करीब 422 मेगावाट बिजली का उत्पादन प्रस्तावित है। इसमें से 211 मेगावाट बिजली उत्तराखंड और 211 मेगावाट बिजली हिमाचल प्रदेश को मिलने का प्रावधान है।

यह बांध उत्तराखंड की टोंस नदी पर बनाया जाएगा, जो आगे जाकर यमुना नदी में मिलती है। परियोजना से बनने वाले जलाशय से हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को सिंचाई और पेयजल के लिए पानी उपलब्ध कराने की योजना है। इसमें दिल्ली के लिए पानी की आपूर्ति भी एक प्रमुख उद्देश्य बताया गया है।

परियोजना के तहत मोहराड़ से त्यूनी तक करीब 32 किलोमीटर लंबी झील बनने की बात सामने आई है। लेकिन इस बड़े प्रोजेक्ट के साथ विस्थापन और पर्यावरण से जुड़ी बड़ी चुनौतियां भी हैं।

सर्वे के मुताबिक, परियोजना के कारण उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में करीब 81,300 पेड़ों पर असर पड़ेगा। इसके अलावा 631 लकड़ी के मकान और 171 पक्के मकान प्रभावित होंगे।

वहीं 632 सामूहिक परिवार और 508 एकल परिवारों के विस्थापन का भी अनुमान है। परियोजना क्षेत्र में 8 मंदिर, 6 पंचायतें, 2 अस्पताल, 7 प्राथमिक स्कूल, 2 मिडिल स्कूल और 1 इंटर कॉलेज भी जलाशय के दायरे में आने की बात कही गई है।

यानी किशाऊ बांध एक तरफ बिजली, सिंचाई और पेयजल की बड़ी जरूरत पूरी करने वाली परियोजना बन सकता है, तो दूसरी तरफ इसके साथ पर्यावरण, पुनर्वास और विस्थापन की चुनौतियां भी उतनी ही बड़ी हैं।