दयारा बुग्याल ट्रैक पर लापता बबीता पांडे की तलाश फिर तेज, घने जंगलों और भालू आवास क्षेत्रों में चलाया जा रहा सर्च ऑपरेशन
उत्तराखंड के चर्चित दयारा बुग्याल ट्रैक लापता मामले में एक बार फिर खोज अभियान तेज कर दिया गया है। करीब एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद रामनगर की रहने वाली बबीता पांडे का अब तक कोई सुराग नहीं लग पाया है। अब पुलिस और रेस्क्यू एजेंसियां नए सिरे से जांच और तलाश में जुट गई हैं।
29 मई को दयारा बुग्याल के गोई क्षेत्र से अचानक लापता हुई बबीता पांडे की तलाश के लिए पहले पुलिस, वन विभाग और एसडीआरएफ ने व्यापक अभियान चलाया था। बाद में जिला प्रशासन ने एनडीआरएफ, आईटीबीपी, सेना और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान की टीमों को भी इस अभियान में शामिल किया। यहां तक कि हेलीकॉप्टर की मदद से भी दुर्गम इलाकों की तलाशी ली गई, लेकिन कोई सफलता हाथ नहीं लगी।
इधर पुलिस ने अपहरण की आशंका के तहत दो युवकों के खिलाफ मामला दर्ज कर तकनीकी जांच भी शुरू की थी, लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग सामने नहीं आया है। कुछ दिनों से धीमा पड़ा रेस्क्यू अभियान अब फिर से पूरी ताकत के साथ शुरू किया गया है।
मंगलवार को अभियान का नेतृत्व कर रहे सीओ जनक सिंह पंवार और सीओ बड़कोट चंचल शर्मा पुलिस, वन विभाग, एसडीआरएफ और क्यूआरटी टीमों के साथ दयारा क्षेत्र पहुंचे। इस बार खोजबीन का फोकस नटीण के घने जंगलों पर रखा गया है, जहां भालुओं के संभावित आवास वाले क्षेत्रों में गहन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।
टीम ने जंगल के भीतर मौजूद पानी के टैंकों की भी जांच की है। इसके अलावा पहले से खुदे हुए संदिग्ध स्थानों को दोबारा खोदकर और उनमें पानी डालकर बारीकी से जांच की जा रही है, ताकि किसी भी संभावित सुराग को नजरअंदाज न किया जाए।
फिलहाल बबीता पांडे की तलाश जारी है और प्रशासन का कहना है कि जब तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिलती, तब तक खोज अभियान जारी रहेगा। इस मामले पर पूरे उत्तराखंड की नजरें टिकी हुई हैं और परिवार को अब भी अपनी बेटी के सुरक्षित मिलने की उम्मीद है।

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