चमोली टनल हादसा: मलबे और पानी के सैलाब में फंसे मजदूर, सात की मौत
उत्तराखंड के चमोली जिले में निर्माणाधीन टनल में हुए हादसे का मंजर बेहद दिल दहला देने वाला था। अचानक सुरंग के अंदर करीब 150 मीटर दूर तेज आवाज के साथ भारी भूस्खलन हुआ। देखते ही देखते मलबा, पानी और बड़े-बड़े पत्थर तेज रफ्तार से टनल के भीतर घुस आए।
मलबे के तेज धक्के से कई मजदूर दूर जा गिरे, जबकि कुछ लोग मलबे में दब गए। हादसे के दौरान मजदूरों में चीख-पुकार मच गई और कई लोग बचाओ-बचाओ चिल्लाने लगे। टनल के अंदर कई जगह मलबा भर जाने से ऑक्सीजन का स्तर बेहद कम हो गया, जिससे मजदूरों को सांस लेने में भी परेशानी होने लगी।
बताया जा रहा है कि यह हादसा जेसाल गांव के नीचे हुआ। हैरानी की बात यह है कि टनल में पिछले दो दिनों से मलबा गिरने की बात सामने आ रही थी, लेकिन आरोप है कि परियोजना प्रबंधन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
चमोली जिले के मायापुर यानी पीपलकोटी क्षेत्र में टीएचडीसी की निर्माणाधीन विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की टीआरटी टनल में मलबा और पानी भरने के बाद राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है।
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र, देहरादून के अनुसार करीब तीन किलोमीटर लंबी टनल के लगभग 1.50 किलोमीटर हिस्से में भूधंसाव के कारण मलबा और पानी घुस गया था। हादसे के समय अंदर काम कर रहे कुल 22 लोगों के फंसे होने की सूचना थी।
अब तक 12 घायलों को सुरक्षित रेस्क्यू कर बाहर निकाल लिया गया है, जबकि सात लोगों की मौत की सूचना है। तीन लापता लोगों की तलाश के लिए एसडीआरएफ समेत अन्य एजेंसियां लगातार सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं।
राहत एवं बचाव कार्य में सहयोग के लिए टनल के अंदर गए छह बचावकर्मी भी सुरक्षित बताए जा रहे हैं। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती मलबे के बीच फंसे लोगों तक पहुंचना और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना है।

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