उत्तराखंड के लकी रावत का कमाल, आर्कटिक वैज्ञानिक अभियान में करेंगे भारत का प्रतिनिधित्व
उत्तराखंड के चकराता निवासी और सेपियंस स्कूल के कक्षा 10 के छात्र लकी रावत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उनका चयन प्रतिष्ठित वैज्ञानिक एवं शैक्षिक अभियान ‘आइस ब्रेकर ऑफ नॉलेज’ के लिए हुआ है। इस अभियान में लकी भारत के एकमात्र छात्र प्रतिनिधि हैं।
रूस के मुरमान्स्क से शुरू हुए इस दस दिवसीय अभियान में 22 देशों के 14 से 16 वर्ष आयु वर्ग के छात्र भाग ले रहे हैं। अभियान के दौरान प्रतिभागी दुनिया के सबसे शक्तिशाली न्यूक्लियर आइसब्रेकर जहाज ‘50 लेट पोबेडी’ पर सवार होकर 90 डिग्री उत्तरी अक्षांश (नॉर्थ पोल) तक की ऐतिहासिक यात्रा करेंगे। यह अवसर दुनिया के बेहद चुनिंदा लोगों को ही मिलता है।
तीन चरणों की कठिन चयन प्रक्रिया पार की
लकी रावत ने बताया कि इस प्रतिष्ठित अभियान तक पहुंचने के लिए उन्हें तीन चरणों वाली कठिन चयन प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। हर देश से केवल एक छात्र का चयन किया गया, जिसमें भारत की ओर से उन्हें यह सम्मान मिला।
लकी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए गर्व का क्षण है। उनका मानना है कि यह अनुभव विज्ञान, अनुसंधान और वैश्विक सहयोग के क्षेत्र में आगे बढ़ने की नई प्रेरणा देगा और भविष्य में वैज्ञानिक शोध के प्रति उनकी रुचि को और मजबूत करेगा
उत्तराखंड के लकी रावत का कमाल, आर्कटिक वैज्ञानिक अभियान में करेंगे भारत का प्रतिनिधित्व
उत्तराखंड के चकराता निवासी और सेपियंस स्कूल के कक्षा 10 के छात्र लकी रावत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उनका चयन प्रतिष्ठित वैज्ञानिक एवं शैक्षिक अभियान ‘आइस ब्रेकर ऑफ नॉलेज’ के लिए हुआ है। इस अभियान में लकी भारत के एकमात्र छात्र प्रतिनिधि हैं।
रूस के मुरमान्स्क से शुरू हुए इस दस दिवसीय अभियान में 22 देशों के 14 से 16 वर्ष आयु वर्ग के छात्र भाग ले रहे हैं। अभियान के दौरान प्रतिभागी दुनिया के सबसे शक्तिशाली न्यूक्लियर आइसब्रेकर जहाज ‘50 लेट पोबेडी’ पर सवार होकर 90 डिग्री उत्तरी अक्षांश (नॉर्थ पोल) तक की ऐतिहासिक यात्रा करेंगे। यह अवसर दुनिया के बेहद चुनिंदा लोगों को ही मिलता है।
तीन चरणों की कठिन चयन प्रक्रिया पार की
लकी रावत ने बताया कि इस प्रतिष्ठित अभियान तक पहुंचने के लिए उन्हें तीन चरणों वाली कठिन चयन प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। हर देश से केवल एक छात्र का चयन किया गया, जिसमें भारत की ओर से उन्हें यह सम्मान मिला।
लकी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए गर्व का क्षण है। उनका मानना है कि यह अनुभव विज्ञान, अनुसंधान और वैश्विक सहयोग के क्षेत्र में आगे बढ़ने की नई प्रेरणा देगा और भविष्य में वैज्ञानिक शोध के प्रति उनकी रुचि को और मजबूत करेगा।

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