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दुःखद खबर: देवभूमि के लाल ने देश के लिए दिया सर्वोच्च बलिदान 

दुःखद खबर: देवभूमि के लाल ने देश के लिए दिया सर्वोच्च बलिदान

पिथौरागढ़: सिक्किम की बर्फीली पहाड़ियों में ड्यूटी निभाते हुए पिथौरागढ़ के गणकोट क्षेत्र के सुकोली गांव का 19 वर्षीय लांस नायक विकास कुमार हिमस्खलन की चपेट में आकर शहीद हो गया। इस दुखद घटना से पूरे उत्तराखंड में शोक की लहर दौड़ गई है, जबकि शहीद के गांव और परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

जानकारी के अनुसार, भारतीय सेना की 19 कुमाऊं रेजिमेंट में तैनात लांस नायक विकास कुमार 29 मार्च 2026 को सिक्किम सीमा पर अपने दो साथियों के साथ नियमित गश्त पर थे। अचानक तेज हिमस्खलन (एवलांच) आ गया, जिसमें विकास कुमार सीधे चपेट में आ गए। उनके दोनों साथी किसी तरह सुरक्षित बच निकले, लेकिन विकास कुमार को बचाया नहीं जा सका। घटना की सूचना मिलते ही सेना और स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया।

सिर्फ 19 साल की उम्र में देश की रक्षा करते हुए शहादत

विकास कुमार मात्र 19 वर्ष की छोटी उम्र में ही कर्तव्य पथ पर चलते हुए अमर हो गए। उन्होंने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए कम उम्र में ही सेना में भर्ती होकर देशसेवा का संकल्प लिया था। उनकी शहादत ने न केवल परिवार को झकझोर दिया है, बल्कि पूरे कुमाऊं क्षेत्र को गर्व और शोक के मिले-जुले भाव से भर दिया है। लोग कह रहे हैं कि “हमारा बेटा देश के लिए शहीद हुआ, यह गौरव की बात है।”

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

शहीद विकास कुमार अपने पीछे एक अधूरी परिवार छोड़ गए हैं। पिता गणेश और मां मंजू देवी (जो भोजन माता के पद पर कार्यरत हैं) का रो-रोकर बुरा हाल है।  पूरा परिवार अब शहीद के पार्थिव शरीर के आने का इंतजार कर रहा है। गांव के लोग लगातार परिवार के घर पहुंचकर सांत्वना दे रहे हैं और शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।

 

स्थानीय लोगों ने बताया कि विकास कुमार एक जुझारू और सकारात्मक सोच वाले युवक थे। छोटी उम्र में ही उन्होंने सेना में शामिल होकर परिवार और गांव का नाम रोशन किया था। उनकी शहादत पर पूरे सुकोली गांव और आसपास के क्षेत्र में शोक व्याप्त है। कई लोग कह रहे हैं, “देश के लिए बलिदान देने वाला हर सैनिक अमर है।”

सेना के सूत्रों के अनुसार शहीद के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द उनके गांव पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। उत्तराखंड सरकार और पिथौरागढ़ प्रशासन भी परिवार को हर संभव मदद मुहैया कराने का आश्वासन दिया है। शहीद विकास कुमार को पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी।

यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि हमारे सैनिक कितनी कठिन परिस्थितियों में सीमा पर डटे रहते हैं। हिमालय की ऊंची चोटियों पर बर्फ, ठंड और हिमस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं का सामना करते हुए भी वे देश की रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं।