नंदा देवी राजजात 2026 में नहीं, अब 2027 में होगी आयोजित
कर्णप्रयाग : उत्तराखंड की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान मानी जाने वाली नंदा देवी राजजात यात्रा वर्ष 2026 में आयोजित नहीं की जाएगी। श्रीनंदा देवी राजजात समिति ने इसे एक वर्ष के लिए स्थगित कर 2027 में आयोजित करने का निर्णय लिया है।
इस संबंध में श्रीनंदा देवी राजजात समिति के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुंवर ने कर्णप्रयाग में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि हिमालयी क्षेत्र में यात्रा से जुड़े कई आवश्यक कार्य समय पर पूरे नहीं हो पाए हैं, जिसके चलते समिति ने यह कठिन लेकिन आवश्यक फैसला लिया है।
डॉ. कुंवर ने स्पष्ट किया कि नंदा देवी राजजात जैसी विराट और आस्था से जुड़ी यात्रा के लिए मार्गों का सुधार, पुलों का निर्माण, ठहराव स्थलों की व्यवस्था, सुरक्षा इंतजाम और अन्य आधारभूत सुविधाओं का पूर्ण होना अत्यंत आवश्यक है। वर्तमान परिस्थितियों में इन तैयारियों को समय पर पूरा करना संभव नहीं हो सका।
उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा, सुविधा और परंपराओं की मर्यादा को देखते हुए राजजात को स्थगित करना ही बेहतर विकल्प था। अब समिति का लक्ष्य है कि 2027 में पूरी तैयारी और भव्यता के साथ नंदा देवी राजजात का आयोजन किया जाए।
गौरतलब है कि नंदा देवी राजजात को उत्तराखंड का हिमालयी महाकुंभ भी कहा जाता है। यह यात्रा हर 12 वर्ष में एक बार निकलती है और लगभग 280 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा होती है। यह यात्रा चमोली जनपद के नौटी गांव से शुरू होकर कठिन हिमालयी मार्गों से गुजरते हुए रूपकुंड और होमकुंड तक पहुंचती है।
यह राजजात केवल एक धार्मिक यात्रा ही नहीं, बल्कि गढ़वाल क्षेत्र की लोक आस्थाओं, देवी-देवताओं की परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है। देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु, साधु-संत और पर्यटक इसमें शामिल होते हैं।
समिति के इस निर्णय के बाद श्रद्धालुओं में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। जहां कुछ लोग निराश हैं, वहीं अधिकांश लोगों ने यात्रा की सुरक्षा और सुव्यवस्था को प्राथमिकता देने के निर्णय का समर्थन किया है।
अब सभी की निगाहें वर्ष 2027 पर टिकी हैं, जब पूरी तैयारी के साथ नंदा देवी राजजात एक बार फिर उत्तराखंड की सांस्कृतिक आत्मा को जीवंत करेगी।

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